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भिट्ठीकला जमीन फर्जीवाड़ा मामला: कलेक्टर अजीत वसंत ने दिए एफआईआर के निर्देश, ऑनलाइन रजिस्ट्री पर उठे सवाल,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर। ग्राम भिट्ठीकला में एक विधवा महिला की जमीन के कथित फर्जी विक्रय का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी के लगातार प्रयासों तथा पीड़िता की शिकायत के बाद सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने पूरे प्रकरण की जांच कराते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। मामला ग्राम भिट्ठीकला-महुआटिकरा निवासी सावित्री यादव की भूमि से जुड़ा हुआ है।

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सावित्री यादव ने प्रशासन को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी खसरा क्रमांक 782, 783 और 790 की कुल 1.271 हेक्टेयर (करीब 3.14 एकड़) भूमि में से केवल 24 डिसमिल जमीन का सौदा रायपुर निवासी पुष्पा अग्रवाल के साथ 3 लाख रुपये प्रति डिसमिल की दर से 72 लाख रुपये में तय हुआ था। आरोप है कि इसके बावजूद कथित रूप से षड्यंत्रपूर्वक उनकी पूरी भूमि का विक्रय पत्र तैयार कर ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकृत करा लिया गया।

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जांच में मिले शिकायत सही होने के संकेत

तहसीलदार और एसडीएम (राजस्व) अंबिकापुर द्वारा की गई जांच, मौका निरीक्षण तथा पटवारी प्रतिवेदन के अवलोकन में यह तथ्य सामने आया कि विक्रय के लिए सीमित भूमि पर सहमति बनी थी, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में पूरी भूमि का विक्रय दर्ज हो गया। जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रशासन ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज कराने के दिए निर्देश

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर अजीत वसंत ने तहसीलदार अंबिकापुर को निर्देशित किया है कि कथित कूटरचित विक्रय पत्र और भूमि हस्तांतरण में शामिल पाए गए लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

निर्देश में रायपुर निवासी पुष्पा अग्रवाल, सागर विश्वकर्मा, डोमन राजवाड़े, जीतन विश्वकर्मा, आशीष उर्फ बाबा तथा दस्तावेज लेखक कमर कादरी के नाम शामिल बताए गए हैं। प्रशासन ने मामले में वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए तत्काल पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं।

ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने भूमि पंजीयन और ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सौदा केवल 24 डिसमिल भूमि का था, तो फिर पूरी 1.271 हेक्टेयर भूमि का हस्तांतरण किस स्तर पर और किन दस्तावेजों के आधार पर दर्ज हुआ? क्या दस्तावेजों की जांच में लापरवाही बरती गई या फिर सुनियोजित तरीके से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया?

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था में सुरक्षा और सत्यापन के मौजूदा तंत्र कितने प्रभावी हैं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।

पीड़िता को न्याय मिलने की जगी उम्मीद

लंबे समय से अपनी जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही सावित्री यादव को अब प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. अकील अहमद अंसारी ने कहा कि गरीब, विधवा और असहाय लोगों की जमीनों पर होने वाले कथित फर्जीवाड़ों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं होती तो पीड़िता अपनी पुश्तैनी जमीन से पूरी तरह वंचित हो सकती थी। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की है।

पुलिस जांच के बाद सामने आएंगे कई अहम तथ्य

अब पूरे मामले में एफआईआर दर्ज होने और पुलिस जांच शुरू होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित भूमि फर्जीवाड़े के पीछे किन लोगों की भूमिका रही, किस स्तर पर दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई और ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में हुई इस बड़ी चूक की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इस मामले पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।

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