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करोड़ों के घोटालों में घिरे दो पूर्व शाखा प्रबंधकों की भैयाथान में वापसी की चर्चा, सहकारिता बैंक की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल,

Bharat Sharma

सरजपुर। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की भैयाथान शाखा एक बार फिर सुर्खियों में है। करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के आरोप झेल चुके दो पूर्व शाखा प्रबंधकों की संभावित वापसी को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि बैंक प्रबंधन या सहकारिता विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के दावों ने पूरे मामले को फिर गरमा दिया है।

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2.25 करोड़ का पशुपालन ऋण प्रकरण

भैयाथान शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अजीत सिंह पर करीब 2 करोड़ 25 लाख रुपये के पशुपालन ऋण वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच में कई हितग्राहियों के नाम पर संदिग्ध ऋण स्वीकृति, अधूरे दस्तावेज और नियमों की अनदेखी जैसे बिंदु सामने आए थे। कुछ मामलों में पशुओं के अस्तित्व पर भी सवाल उठे थे। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई हुई थी।

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35.38 लाख का फसल बीमा विवाद

इसके बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक जगदीश कुशवाहा का नाम करीब 35 लाख 38 हजार रुपये के फसल बीमा प्रकरण में अनियमितताओं को लेकर चर्चा में आया। स्थानीय स्तर पर मामला काफी समय तक सुर्खियों में रहा, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी और ठोस कार्रवाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई।

बहाली की चर्चाओं से बढ़ी हलचल

सूत्रों का दावा है कि पहले कार्रवाई झेल चुके एक अधिकारी की बहाली हो चुकी है और अब दूसरे अधिकारी की वापसी को लेकर भी प्रयास जारी हैं। अंबिकापुर में बैठकों और संपर्कों का दौर चलने की चर्चा है। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।

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साख पर सवाल

कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गंभीर आरोपों के बाद भी अधिकारियों की वापसी होती है, तो इससे सहकारिता विभाग की साख पर असर पड़ेगा। वहीं यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि आरोप प्रमाणित नहीं थे तो कार्रवाई क्यों हुई और यदि आरोप गंभीर थे तो बहाली कैसे संभव है?

जनता के सवाल

  • क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
  • क्या बहाली से पहले जवाबदेही तय होगी?
  • क्या सहकारिता बैंक में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी?

फिलहाल बैंक प्रबंधन और सहकारिता विभाग की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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