सूरजपुर ।
जिला न्यायालय सूरजपुर के सभागार में 6 अक्टूबर 2026 को साइबर क्राइम, डिजिटल अरेस्ट, साइबर सुरक्षा एवं किशोर न्याय अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पैरालीगल वॉलेंटियर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य पैरालीगल वॉलेंटियर्स को बदलते साइबर अपराधों,बीऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव तथा बच्चों से जुड़े विधिक प्रावधानों की जानकारी देकर उन्हें आमजन तक जागरूकता पहुंचाने के लिए सक्षम बनाना रहा।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर थॉमस एक्का के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव पायल टोपनो की देखरेख में आयोजित हुई।
डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी से बचाव की जानकारी–
प्रशिक्षण के दौरान साइबर सेल प्रभारी अधिकारी जावेद मियादाद, साइबर विशेषज्ञ विनोद सारथी एवं सहायक राय सिंह ने पैरालीगल वॉलेंटियर्स को साइबर अपराध के बदलते स्वरूप से अवगत कराया। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी तथा साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में साइबर अपराध से बचाव के व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा की गई। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि पैरालीगल वॉलेंटियर्स अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को साइबर अपराधों के नए तरीकों के प्रति सतर्क करें, ताकि जागरूकता के माध्यम से साइबर ठगी के मामलों को रोकने में मदद मिल सके।
किशोर न्याय अधिनियम पर विशेष सत्र–
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण सत्र किशोर न्याय अधिनियम पर केंद्रित रहा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव पायल टोपनो, जो पूर्व में किशोर न्याय बोर्ड सूरजपुर की पीठासीन अधिकारी भी रह चुकी हैं, ने बच्चों से संबंधित विधिक प्रावधानों, उनके अधिकारों और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करने, उन्हें उपलब्ध विधिक संरक्षण की जानकारी रखने तथा बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिए जागरूकता को आवश्यक बताया।
गांव और बस्तियों तक पहुंचेगी विधिक जागरूकता-
कार्यशाला में यह संदेश भी दिया गया कि पैरालीगल वॉलेंटियर्स न्याय व्यवस्था और समाज के अंतिम व्यक्ति के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से मिली जानकारी को गांवों, बस्तियों और आम नागरिकों तक पहुंचाकर साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ही बच्चों के अधिकारों और किशोर न्याय संबंधी कानूनों की जानकारी जन- जन तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर प्राप्त जानकारी को समाज के उस वर्ग तक पहुंचाना है, जहां साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी अथवा बच्चों से जुड़े कानूनी अधिकारों की जानकारी सीमित हो सकती है।
पैरालीगल वॉलेंटियर्स के माध्यम से न्याय और विधिक जागरूकता को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।