बी.पी.एस. पोया बोले- अधिकारों की जानकारी और जागरूक ग्राम सभा ही समाज के हितों की प्रभावी रक्षा कर सकती है
सूरजपुर। आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत रामेश्वरम स्थित अंबेडकर भवन में रविवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। अतिथियों का अक्षत-तिलक से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग सूरजपुर के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने की। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, ग्राम सभा की भूमिका, शिक्षा, जल-जंगल-जमीन, भाषा, संस्कृति और सामुदायिक अधिकारों को लेकर चर्चा की गई।
अधिकारों की जानकारी हर व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी : पोया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बी.पी.एस. पोया ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार केवल कानून और सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अधिकारों की रक्षा के लिए ग्राम सभा को मजबूत करना और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण है।
पोया ने बताया कि 13 सितंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा को अपनाया था। उनके अनुसार घोषणा को 143 देशों का समर्थन मिला था, जबकि चार देशों ने विरोध किया और 11 देश मतदान से अलग रहे। उन्होंने इसे स्वदेशी समुदायों की पहचान, संस्कृति, सम्मान और अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज बताया।
जल, जंगल और जमीन के साथ भाषा-संस्कृति भी अधिकार
बी.पी.एस. पोया ने कहा कि आदिवासी अधिकार केवल जल, जंगल और जमीन तक सीमित नहीं हैं। भाषा, संस्कृति, परंपरा, पहचान, सामुदायिक जीवन और अपने विकास से जुड़े निर्णयों में भागीदारी भी आदिवासी अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक भूमि और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों की रक्षा, भाषा एवं संस्कृति का संरक्षण तथा विस्थापन, शोषण और भेदभाव से सुरक्षा के लिए समाज को जागरूक और संगठित होना होगा।
इस दौरान उन्होंने पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम, ग्राम सभा की शक्तियों और सामुदायिक वन प्रबंधन के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पेसा नियम लागू किए गए हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में लोगों को अपने अधिकारों और ग्राम सभा की भूमिका के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
गांव, ग्राम सभा और गोटुल शिक्षा की ओर बढ़ाने का आह्वान
पोया ने समाज से शिक्षा और सामुदायिक जागरूकता को अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “हमें एक कदम गांव की ओर, ग्राम सभा की ओर और एक कदम गोटुल शिक्षा की ओर बढ़ाना है।”
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। गोटुल की सामुदायिक भावना को आधुनिक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जोड़कर गांवों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।
शिक्षा को पहली प्राथमिकता दें : बिरसा मुंडा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज से शिक्षा को पहली प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी जननायकों ने संघर्ष के माध्यम से समाज को अधिकारों के लिए आगे बढ़ने की राह दिखाई है। आने वाली पीढ़ी को शिक्षित, जागरूक और सामाजिक-आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।
विशिष्ट अतिथि ज्योति सांगा ने भी शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “आधे रोटी खाएंगे, फिर भी स्कूल जाएंगे।” उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के बेहतर भविष्य और समाज के विकास की मजबूत नींव है।
छात्र-छात्राओं को बांटी गई शैक्षणिक सामग्री
आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं को पेन, चार्ट बोर्ड सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई करने और शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में मोतीलाल उर्रे, सोनसाय मरकाम, दीपक मरावी, प्रमोद सिंह मरावी (कार्यकारिणी अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग रामानुजनगर), दिनेश सिंह उर्रे (उपाध्यक्ष, आदिवासी युवा छात्र संगठन रामानुजनगर), भगवत सिंह नेताम, बबीता, मनीषा, लक्ष्मी एवं शांति सहित गोटुल शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।