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इंदौर/महावीर अलंकरण में जैन समाज की ऐतिहासिक एकजुटता का भव्य प्रदर्शन :सात्विकता की प्ररणा हमें जैन धर्म और भगवान महावीर से मिलती है -मुख्यमंत्री डॉ. यादव ,चार वरिष्ठ समाजसेवियों को दिया ‘महावीर अलंकरण

Priyanshu Ranjan

भरत शर्मा की रिपोर्ट 

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दिगंबर और श्वेताम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन ने दी है समाज सेवा को नई दिशा

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इंदौर 30 मार्च”2500 वर्ष प्राचीन यह धर्म आज भी चिर नवीन और प्रासंगिक है। वर्तमान विषम वैश्विक परिस्थितियों में महावीर का ‘जिओ और जीने दो’ का दर्शन आज न केवल प्रासंगिक है बल्कि अति आवश्यक है। अनेकांत का दर्शन आज की अतीव आवश्यकता है।जीवन में सात्विकता की प्ररणा हमें जैन धर्म और भगबान महावीर से मिलती है।

उक्त विचार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने महावीर अलंकरण समारोह में व्यक्त किए दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन एवं श्वेतांबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित महावीर अलंकरण समारोह रविवार को मदन मोहन मेहता ऑडिटोरियम में भव्य रूप से संपन्न हुआ। पहली बार दोनों समाज एक मंच पर एकत्रित हुए और भगवान महावीर के दर्शन पर वृहद संवाद आयोजित किया गया। यह ऐतिहासिक आयोजन महावीर जयंती जुलूसों से पूर्व उत्सव की गरिमापूर्ण शुरुआत साबित हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज का एक मंच पर एकत्र होना स्थानीय स्तर पर सामूहिक कार्यक्रमों को मजबूत करने के साथ-साथ समाज को नई दिशा प्रदान करता है। साझा जड़ों जैसे अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह पर आधारित यह एकता जैन धर्म की वैश्विक अपील को बढ़ाती है। दीप प्रज्वलन के पश्चात अपने उद्बोधन में उन्होंने विस्तार से कहा, “संप्रदायिक विभेदों को दूर करके धार्मिक संवाद को बढ़ावा देना आज की आधुनिक चुनौतियों—जैसे , वैश्विक युद्धों,पर्यावरण संकट और सामाजिक ध्रुवीकरण—का सामना करने में सहायक सिद्ध होता है। एक मंच से जैन संस्थाओं की गतिविधियां अधिक प्रभावी बनती हैं, विघटन की प्रवृत्ति रुकती है और भगवान महावीर के संदेश को विश्व पटल पर मजबूती से फैलाने का सुनहरा अवसर मिलता है। यह एकता सामाजिक शक्ति का प्रतीक है, जो समाज को आत्मनिर्भर, समरस और मजबूत बनाती है।”

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आयोजन समिति के अध्यक्ष स्वप्निल कोठारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान महावीर ने विचार से बढ़कर चर्या दी। धर्म की मूल भावना यह जानना कि हम शरीर नहीं आत्मा है,यह बोध होते ही हमारी धार्मिक और आद्यात्मिक यात्रा शुरू हो जाती है। जो जैनत्व को मानते हैं वे सब जैन हैं,चाहे वे किसी भी धर्म,सम्प्रदाय, जाति के हों।

श्री स्वप्निल कोठारी ने कहा कि वर्तमान विषम वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इसलिए यह कार्यक्रम सामाजिक एकता एवं विश्व बंधुत्व का सच्चा प्रतीक बन गया। उन्होंने सभी सहभागियों का आभार जताते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक पहल भगवान महावीर के आदर्शों को साकार करने में मील का पत्थर साबित हुई।

अग्निबाण के संपादक राजेश चेलावत ने कहा कि स्वयं पर जीत हांसिल करने वाला जैन होता है।
भगवान महावीर के दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर विस्तृत संवाद के पूर्व सर्वप्रथम दोनों समाजों के दो-दो चयनित समाजसेवी—वरिष्ठ समाजसेवी चन्दनमलजी चौरड़िया, हंसराज जी जैन, संतोष कुमार जी जैन तथा हसमुख जी जैन—को उनके सेवा कार्यों के लिए महावीर अलंकरण अवार्ड प्रदान किए गए।

इस अवसर पर मंत्री तुलसी सिलावट,विधायक रमेश मेंदोला ,नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी मंच पर उपस्थित रहे आयोजन समिति में स्वप्निल कोठारी (अध्यक्ष), राजेश चेलावत (अग्निबाण), विजय मेहता, विमल नाहर, मनोहर झांझरी, प्रदीप चौधरी, राकेश विनायका, सुशील पांड्या, शिखरचंद बापना, मनीष सुराना एवं अमित कासलीवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी जैन बंधु-भगिनियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता से यह कार्यक्रम ऐतिहासिक सफलता हासिल कर सका कार्यक्रम संचालन दिव्यादित्य कोठारी ने किया।

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