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रतलाम के गोल्ड कॉम्प्लेक्स जमीन सौदे का ठगी, कॉलोनाइजर मनीष सुराणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज ,70 करोड़ की मांग 62 करोड़ में तय हुआ था सौदा

Bharat Sharma

भरत शर्मा की रिपोर्ट 

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Ratlam/रतलाम के सप्तम अपर न्यायाधीश राजेश नामदेव ने कॉलोनाइजर मनीष सुराना की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुराना पर निर्माणाधीन गोल्ड कॉम्प्लेक्स की जमीन का सौदा कराने का झांसा देकर सराफा व्यवसायी से 35 लाख रुपए जमीन सौदे आरोप है।

कभी कॉलोनी काटने के नाम पर तो कभी जमीन का सौदा करने के नाम पर लोगों को ठगने वाले मनीष सुराना को न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने आरोपी की अग्रिम जमनात के आवेदन को खारिज कर दिया है।

आरोपी की ओर से अभिभाषक संदीप निगम द्वारा न्यायालय में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई गई थी। जबकि अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने पैरवी की।

आवेदक/अभियुक्त सुराना की ओर से सनी पिता दिलीप सुराना का शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था। इसमें बताया गया था कि आवेदक के विरुद्ध असत्य आधारों पर केस दर्ज किया गया है। इसमें पुलिस उसे गिरफ्तार करना चाहती है जबकि उसका उक्त तथाकथित अपराध से कोई संबंध नहीं है। जमानत आवेदन में कहा गया था कि पुलिस आवेदक को गिरफ्तार कर उसकी सम्मान प्रतिष्ठा को धूमिल करना चाहती है। वह कॉलोनाइजर होकर व्यापार करता है और उसकी समाज में काफी प्रतिष्ठा है। ओर रतलाम नगर का स्थायी निवासी होकर उसकी चल-अचल संपत्ति भी उक्त पते पर स्थित होने से उसके कहीं भी भाग कर जाने की संभावना नहीं है।

न्यायाल द्वारा मामले में स्टेशन रोड थाने से आरोपी की केस डायरी तलब की गई। इस दौरान स्टेशन रोड पुलिस ने अभियोजन के माध्यम से बताया कि यदि आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया गया तो वह प्रकरण की विवेचना में गवाहों को डरायेगा, धमकायेगा और प्रलोभन देगा। इसका प्रकरण पर विपरीत असर पड़ेगा। वह घटना की पुनरावृत्ति करेगा। अभियोजन की ओर से यह भी बताया गया कि आरोपी के विरुद्ध ग्राम पंचायत की जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी काटने का अपराध भी पहले से दर्ज है। ऐसे में आरोपी के फरार होने की संभावना रहेगी। अतः आरोपी का अग्रिम जमानत का आवेदन निरस्त किया जाना उचित होगा।

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न्यायालय ने इस पर किया निरस्त

न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्क सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि केस डायरी के अवलोकन से दर्शित है कि आवेदक / अभियुक्त द्वारा धोखाधड़ी कर अपराध किया गया है। वर्तमान में इस प्रकृति के गंभीर अपराध समाज में घटित हो रहे हैं। विवेचना अपूर्ण है। अतः अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए आवेदक / अभियुक्त मनीष सुराना को अग्रिम प्रतिभूति का लाभ दिया जाना न्यायालय उचित नहीं समझता। इस आधार पर आवेदन स्वीकार योग्य न होने से निरस्त किया जाता है

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