भरत शर्मा की रिपोर्ट

रतलाम /कांग्रेस की जिला प्रवक्ता रश्मि सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जी ने राज्यसभा नहीं जाने का निर्णय लिया है।इसका कांग्रेस पार्टी स्वागत करती है। ये त्याग की भावना कोई पहली बार नहीं है,इसके पहले सन् 2003 में जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी तब भी घोषणा के अनुरूप,दिग्विजय सिंह जी ने 10 वर्ष तक कोई भी पद नहीं लिया। उसके बाद सन् 2022 में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव होना था, लेकिन एक दलित राष्ट्रीय नेता मल्लिकार्जुन खड़गे जी के सामने अपना फार्म वापस ले लिया।और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का पूर्ण समर्थन किया।
दिग्विजय सिंह जी का दलितों आदिवासियों के प्रति सकारात्मक त्याग की भावना हमेशा रही है। दो दिवस पूर्व भोपाल में आयोजित भोपाल डिक्लेरेशन -2 कार्यक्रम में, जोकि दलित आदिवासी संगठनों के बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा आयोजित था, उसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि “मध्यप्रदेश में कोई दलित, आदिवासी मुख्यमंत्री बनता है तो उन्हें बहुत खुशी होगी” । जब दिग्विजय सिंह जी की मध्यप्रदेश में सरकार थी तब दलित एजेंडा चलाया गया, जिसमें दलितों, आदिवासियों को भूमि के पट्टे वितरित किए गए।बैकलोग की सरकारी भर्तियां की गई। सरकारी ठेकेदारी में भागीदारी दी गई।ऐसे अनेकों कार्य किए,जिनको हमेशा याद किया जाएगा। हज़ारों पंचायत सचिवों एवं शिक्षाकर्मियों की भर्ती की गई।
आपके कार्यकाल को हमेशा याद किया जाएगा। वर्तमान में संविधान विरोधी, दलित विरोधी, आदिवासी विरोधी,महिला विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए दलित व आदिवासी समाज बहुत तेजी से कांग्रेस से जुड़ रहा है। और कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा सरकारों से लगातार संघर्ष कर रहा है।
आगे रश्मि सिंह ने कहा कि राज्यसभा की सीट खाली होगी,तो इस बार कांग्रेस पार्टी मध्यप्रदेश के लोकप्रिय दलित नेता , विधायक फूलसिंह बरैया या अजा विभाग के प्रदेश अध्यक्ष युवा नेता प्रदीप अहिरवार को राज्यसभा जाने का अवसर मिले।इन दोनों नेताओं की मध्यप्रदेश के सभी जिलों में अच्छी पकड़ है।इनके कारण मध्यप्रदेश का दलित समाज कांग्रेस की तरफ झुक गया है। कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व भी दलितों, आदिवासियों को लगातार संगठन में भागीदारी दे रहा है। मुझे उम्मीद है कि राज्यसभा में भी दलित नेतृत्व को अवसर मिलेगा। यह मेरे निजी विचार हैं!!आगे पार्टी जो निर्णय लेगी ,उसका स्वागत किया जाएगा।



