AAJ24

[state_mirror_header]

चिरगिरी नगर पालिका के वार्ड 22 में जर्जर सुलभ शौचालय, 30-40 परिवारों की रोजमर्रा की सुविधा पर संकट, प्रशासन की लापरवाही उजागर

Priyanshu Ranjan

चिरगिरी, 22 जून 2025: चिरगिरी नगर पालिका निगम के वार्ड नंबर 22, सुभाषिनी लाइन में संचालित सुलभ शौचालय की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है।

यह शौचालय, जो आसपास की बस्ती में रहने वाले लगभग 50 परिवारों के लिए 24 घंटे उपयोगी है, अब जर्जर हालत में पहुंच गया है। कई जगहों पर फर्श धंसने लगा है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटिया निर्माण सामग्री और ठेकेदार की लापरवाही के कारण यह शौचालय मात्र 15-20 वर्षों में ही खस्ताहाल हो गया।

- Advertisement -

स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस शौचालय का निर्माण ठेकेदार द्वारा मनमाने ढंग से किया गया। निर्माण के दौरान न तो नगर निगम का कोई इंजीनियर मौके पर था और न ही कोई टाइमकीपर। इस लापरवाही का नतीजा है कि आज यह शौचालय उपयोग के लिए असुरक्षित हो गया है। निवासियों ने मांग की है कि ऐसे ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया जाए और उनकी जिम्मेदारी तय की जाए।

- Advertisement -

सामुदायिक भवन का भी बुरा हाल:

इसी क्षेत्र में एक सामुदायिक भवन, जिसका निर्माण दो वर्ष पहले शुरू हुआ था, अभी तक न तो पूरा हुआ और न ही इसका उद्घाटन हुआ। भवन की छत पर भारी मात्रा में पानी जमा हो रहा है, जिससे संरचना को नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के समय गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण यह भवन भी समय से पहले जर्जर होने की कगार पर है।

नागरिकों की मांग:

वार्ड 22 के निवासी अब नगर पालिका से इस शौचालय और सामुदायिक भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो वे मजबूरन अन्य रास्ते अपनाएंगे। निवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील की है, ताकि उनकी रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित न हों और किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

नगर पालिका की चुप्पी:

इस मामले में वार्ड पार्षद रुक्मणी केवट का कहना है कि पालिका के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

चिरगिरी नगर पालिका के वार्ड 22 में सुलभ शौचालय और सामुदायिक भवन की जर्जर स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन जैसे महत्वाकांक्षी अभियानों पर भी सवाल उठाती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और जनता की समस्याओं का समाधान कब तक करता है।

See also  शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यानमाला: उर्मिलेश बोले- अंबेडकर सिर्फ दलितों के नहीं, मानवता के मसीहा थे; पूनम वासम ने मुकेश चंद्राकर की ओर से स्वीकारा लोकजतन सम्मान, कनक तिवारी का भी विचारोत्तेजक व्याख्यान

 

Share This Article